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एक बार आराम से बैठे थे हम, हो गए थे बहुत दिन
अचानक स्कूल का निमंत्रण आया की कल है तुम्हारा “पीटीएम”
स्कूल पहुंचे तो देखा वहां हृदय विदारक नजारे, कोई उदास बैठा था कोई रो रहा था बेंच के किनारे
कुछ बच्चे क्लास में जाने के लिए लग रहे थे भयभीत, मानो काल के सामने हो गया है उनका नाम मनोनीत
खैर जैसे तैसे डरते घबराते हम भी कक्षा में हुए दाखिल
मैडम जी का तनाव हुआ चेहरा देखकर बैठने लगा हमारा दिल
मैडम सीधे गुर्राई बोली लड़का तुम्हारा है शरारती बहुत ,नहीं लाता करके कभी भी होमवर्क
कितनी बार शिकायत भेजी है क्यों नहीं आते तुम्हारे दस्तखत
यह सुनकर हम तिलमिलाए, थोड़ा सा झल्लाए , फिर संभलकर बोले अच्छी आदतें व भाषा सीखाना यह है “आपका” काम, इसीलिए तो भेजते हैं आपके स्कूल ” लिटिल एंजेल फॉर्म ”
मैडम ने हमें कातर नजरों से घूरा और परीक्षा फल दोबारा टटोला
ज्यादातर विषयों में लड़के के नंबर हैं कम, अंग्रेजी की तो टांग तोड़ता रहता है, लल्ला तुम्हारा हरदम
सुनकर हम तनिक चकराए लेकिन कुछ सोचकर अपना सीना चौढ़ाए
बोले मैडम, हम तो हिंदी माध्यम में पढ़े थे और बिना मदद फर्राटेदार हिंदी बोलना सीखे थे
अब इस बार ,इस तंज से मैडम तिलमिलाई, थोड़ा सा घबराई फिर धीरे से बुदबुदाई मेरी कक्षा में हैं 50 बच्चे नहीं दे सकती मैं हर बालक पर ध्यान, लल्ला तुम्हारा है तुम्ही को बनाना होगा उसका विधान
बस इतना कहकर वह हो गई अंतर्ध्यान
घर आकर हम सोच में पड़ गए कि क्या हो गया है यह शिक्षा का हाल
थोड़ी-थोड़ी समझ में आने लगा की स्कूल के विद्यार्थी क्यों रहते हैं इतने बदहाल
सदियां बीत गई लेकिन नहीं बदली आज तक स्कूलों की सूरत, आज के आधुनिक युग में क्यों है “बार बार” परीक्षा की जरूरत
महान वैज्ञानिक फ्रेंकलिन और एडिसन तो एक दो बरस गए थे स्कूल
बड़े-बड़े आविष्कार किए उन्होंने जीवन में , “स्वयं शिक्षा” ही था उसका मूल
समय आ गया है की बदलने होंगे परीक्षा के नियम
परिपक्व होने पर ही करना होगा विद्यार्थियों पर यह जुल्मों सितम
मातृभाषा में सीखें भारत के विद्यार्थी हर शालाओं में
बेहतर किताबें और हर विद्यार्थी के मार्गदर्शन का प्रावधान हो शहर, शहर गाँव ,गाँव में
एकलव्य तो देखकर और अभिमन्यु तो सुनकर ही बने थे तीरंदाजी के महारथी
बार-बार परीक्षा देने से “बाधित” होती है विद्यार्थी की सोचने समझने की शक्ति
इस बात से सीख लेकर सबसे पहले मैंने अपने लड़के की स्कूल “छुड़वाई”
ओपन बोर्ड परीक्षा देने से पहले किताबें और एनसाइक्लोपीडिया पढ़ने की आदत लगवाई
आज आपकी दुआओं से लड़का मेरा हो गया है स्नातक
माध्यमिक कक्षा के विद्यार्थियों को ट्यूशन पढ़ाता है वह, है उनका प्रिय अध्यापक
आशा करता हूं कि इस घटना से स्कूल वाले भी ले थोड़ा सा सबक
ना ले विद्यार्थियों की परीक्षा बार-बार न दे उन्हें हर समय होमवर्क ,न दे उन्हें हर समय होमवर्क
जय अभिमन्यु ,जय एकलव्य
राजीव मगन
