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आज फिर शहर में हुई एक जवान मौत
आगे आगे सड़क पर मैं चल रहा था नजदीक से मौत का एक कारवां निकल रहा था
पूछा तो किसी ने बताया कि वह एक होनहार नौजवान था
कुछ ही दिन पहले आया था, परीक्षा फल एग्जाम का
उसने सवेरे उठकर ही लगा थी फांसी ,
नहीं पता चला उसे की सफलता तो है, जीवन की सिर्फ “एक” झांकी
अब मां-बाप का हो रहा है रो-रो कर बुरा हाल
दे जाएगा उन्हें जिंदगी भर का गम ,मरते वक्त क्यों नहीं आया उसे यह ख्याल
लेकिन क्या ऐसे ही हुआ था, उन पर यह सितम ? 2
बचपन का समय तो खेल कूद का भी था, दोस्तों के साथ हंसने लड़ने और ख़ुशी ख़ुशी पढ़ने का भी था पर लगा रहता सिर्फ पढ़ाई ही में वह सुबह शाम
स्कूल वाले भी उसे होमवर्क देते रहते ,नहीं था उन्हें कोई और काम
हर महीने एग्जाम टाइम पर लेते , लड़का रहता था परेशान 2
भाषा भी उसके समझ में नहीं आई थी, कैसे आते अच्छे परिणाम
स्कूल से वक्त पर शर्ट खरीदता,खरीदता जूते और टाई
वैसे सब कुछ ठीक चल रहा था ,पर अपने लिए भी किताबेें पढ़े ऐसी समझ उसकी नहीं बन पाई
विविध किताबें पढ़ना, प्रयोग करना,तजुर्बे लेना बच्चों से घुलना मिलना ,नहीं था उसे किसी ने सिखाया एग्जाम की तैयारी करना और समय-समय पर परीक्षा देना, यही जीवन है, उसे समझ में आया
लोग कहते कि तुम्हें बनना है डॉक्टर, इंजीनियर या बड़ा अफसर 2
अपने मन में क्या चल रहा है यह बताने का, किसी ने दिया ही नहीं उसे कभी ,अवसर
बार-बार परीक्षा देना , उलाहने सहना प्रताड़ना झेलना , निकल रहा था धीर धीरे उसका दम
बिना सोचे समझ नहीं , घोर निराशा में उठाया था उसने इतना बड़ा कदम
अचानक मेरी नींद खुली २ और देखा कि सभी तो हैं घर पर हाजिर
ना कोई मरा है ना कोई दुर्घटना है फिर क्यों हुआ मेरा मन अस्थिर
कसम खाई उस वक्त मैंने, कि अब नहीं लूंगा मैं परीक्षा
जितना हो सके बच्चों को सिखाऊंगा तजुर्बे से ,भाषा की नींव पहले रखूंगा
सपना तो बहुत बुरा था आशा करता हूं किसी के साथ ना हो ऐसी घटना
सीख इस कविता से लो, की बच्चों के साथ कैसे है चलना, कैसे है चलना ,कैसे है चलना
राजीव मगन
(पूरी दुनिया में भारत में सबसे ज्यादा विद्यार्थी आत्महत्या करते हैं ,उनके लिए)
