एक बार आराम से बैठे थे हम, हो गए थे बहुत दिन अचानक स्कूल का निमंत्रण आया...
POETRY OCEAN
आज फिर शहर में हुई एक जवान मौत आगे आगे सड़क पर मैं चल रहा था नजदीक...
कौवा हंस की चाल चले तो हंस नहीं कहलाएगा बगुला पंख लगा कर क्या मोर जैसा नाच...
धरती का आँचल लहराता है, पुष्पों की सुगंध से मन खिल जाता है, वर्षा की बूंदों से...
सब कुछ खुल जाने से बहुत कुछ साफ साफ दिखता है फिर वह बातें हों या मुलायम...
गर्मी भर ढोता रहा रोज़ ईटें पसीने को बेचता रहा जो घर परिवार से दूर वही था...
कभी एक कैनवस से दूसरे कैनवस की यात्रा बहुत लंबी होती है अनुभव के रंग और अनुभूति...
नयनो का दर्पण राज़ को राज़ रहने दे तब न बोल ही देता सच सच के अन्दर...
कल की गलतियां, आज की सांसे रोकती है, आज की गलतियां, आने वाले कल की, कल और...
बहुत सारे किस्से हैं, बहुत सारे फसाने हैं, कुछ तुमसे सुनने हैं, कुछ तुमको सुनाने हैं, कुछ...
