world war 2
लेखक: राजीव मगन
1 सितम्बर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया । इंग्लैंड और फ्रांस देश पोलैंड के साथी थे और इस परिस्तिथि में उन्होंने, जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । आने वाले कुछ वर्षों में लगभग ३० देशों ने इसमें हिस्सा लिया जिसमे हंगरी ,भारत ,अमरीका ,जापान ,चीन ,ऑस्ट्रेलिया ,इटली अन्य देश थे । यह युद्ध इतिहास में अब तक का सबसे भयावह युद्ध रहा है ,यह धरती के लगभग हर महाद्वीप पर लड़ा गया ,इसमें करोड़ों लोग अगले ६ सालों में मौत के आग़ोश में गए व उतने ही घायल व विस्थापित हुए ।
युद्ध तो १९३९ में शुरू हुआ पर इसकी नींव पहले ही पड़ चुकी थी । १९१4-१८ के पहले विश्व युद्ध की समाप्ती पर हारे हुए जर्मनी पर विजेता देश इंग्लॅण्ड,फ्रांस,अमरीका (इन्हे ऐलिड शक्ति भी कहा जाता था )ने कड़े प्रतिबंध लगाए थे । उनसे आर्थिक हर्जाना भी वसूल किया गया ,जर्मन आम जनता इससे प्रभावित हुई । मुश्किलों की घड़ी में हम देखते हैं की कुछ मौक़ा परास्त लोग सहायता करने का ढोंग रचकर अपना निहित स्वार्थ साधते हैं । इस दौरान ”नाज़ी” पार्टी जिसकेअध्यक्ष “‘अडॉल्फ हिटलर” बने उन्होंने लोगों में नफरत की भावना जगाना शुरू किया इस तरह जर्मनी दो धड़े में धीरे धीरे बँटने लगा । हिटलर ने जबरन सत्ता हासिल करने की कोशिश की पर नाकामयाब रहा, उसे जेल भी मिली,कालांतर, में नए हथकंडों से लेस् व बाहर आया और यहूदियों के खिलाफ लोगों को भड़काने लगा ,उसकी नफरत की राजनीती परवान चढ़ने लगी और पूर्ण बहुमत न मिलने पर भी वह सत्ता पर काबिज हो गया । उसके हौसले और बुलंद हो गए और वह खुलकर जर्मनी में सदियों से बसे हुए यहूदियों का उत्पीड़न करने लगा ,इससे यहूदी वहां से पलायन करने के लिए मजबूर हुए । हिटलर ने अपनी नफरत का प्रचार करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल किया और जर्मनी की जानता उसके झांसे में आ गयी । प्रताड़ना की घटनाओं के लिए उनका मूक समर्थन उसे मिला । युद्ध के पहले २ साल में जर्मनी की सेना ने लगातार जीत हासिल की उसने फ़्रांस की शक्तिशाली सेना को परास्त किया । डेनमार्क ,बेल्जियम ,नॉर्वे ,व ग्रीस, एक के बाद एक कई देशों पर विजयी प्राप्त की । १९४१ में उसने रूस पर हमला किया उसकी सेना हज़ारों किमी रूस के अंदर पहुँच गयी । रूस ने पलटकर जवाबी कार्यवाही करना शुरू किया, स्टेलिनग्राद की लड़ाई सबसे ज्यादा भीषण था । लाखों सैनिक इसमें लड़े और हज़ारों विमान व टेंक का इस्तेमाल हुआ । जर्मनी इस लड़ाई में हार गया और उस की हार का सिलिसिला यहां से शुरू हुआ । जापान ने अमरीका पर १९४१ में हमला किया ,तब अमरीका ,जो अब तक इंग्लैंड को सैनिक साम्रगी सहायता दे रहा था व भी युद्ध में उतर गया । इससे पहले जापान ने चीन के बड़े इलाके पर कब्जा किया था, चीनियों पर कई जुल्म ढाये । चीन के ‘’आरौसी’’ ROC आर्मी ने बेहद कठिन लड़ाई लड़कर उनका सामना किया ।
भारत की इस युद्ध में भूमिका
भारत के २५ लाख ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिकों व अफसरों ने इसमें हिस्सा लिया और जर्मनी, इटली ,जापान से युद्ध किया । यह विश्व की महानतम सेनाओं में से एक कहलाई जाएगी । इसने दुश्मन से डटकर सामना किया । भारतीय हिम्मत और फौलाद का बेमिसाल प्रदर्शन किया ,इस सेना में गोरखे ,सिख ,राजपूत ,मुस्लिम ,एंग्लो इंडियन , मराठा और भारत के अनेक समुदाय के लोग थे । बहादुरी के लिए युद्ध के दौरान अनेक तमगे मिले । हिटलर ने तो गोरखा सैनिकों के बारे में यहां तक कह दिया ‘काश की मेरे पास गोरखों की सेना होती तो में युद्ध जीत जाता’ । आखिरकार ‘अलाइड सेना’ के शक्तिशाली सामूहिक शक्ति और प्रहार के सामने जर्मनी टिक नहीं पाया और हार कबूल की , हिटलर ने खुदखुशी कर ली । पृथ्वी पर सहस्त्रों युद्ध हुए हैं, लेकिन इस युद्ध में मानव पीड़ा की सारी सीमायें पार हो गयी थी ,हिटलर ने यहूदी समुदाय को ख़त्म करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी, उसने लगभग साठ लाख यहूदीयों को बेहरहमी से मौत के घात उतार दिया था । युद्ध समाप्ती के बाद उन पर हुए अत्याचारों व बड़े पैमाने में कत्लेआम की ख़बरों ने दुनिया को झकझोर दिया था । ,यहूदियों को समाप्त करने के लिए उन्होंने एक आसान परन्तु यातनादायक तरीका ढूंढ निकाला था वह था, उन्हें कमरे में बंद(डिटेंशन) करके जेहरीली गैस चलाकर दम घुटने से मार देना । बच्चों बूढ़े और कमजोर महिलाएं उनका पहला शिकार होती थी । जवानों से मरते दम तक काम लिया जाता था ,ज़रा सी गलती पर यातना या मौत के घाट उतर दिया जाता था । बेहद ठण्ड में भूखे पेट काम कराया जाता था । कई जर्मन वैज्ञानिक, यहूदीयों पर क्रूर प्रयोग करते , महिलाओं का शोषण आम बात थी । जर्मन, आम नागरिक उस समय तो मूक दर्शक बनी रहे पर बाद में उसे भी आनेवाले विजयी सेनाओं का आंतक झेलना पड़ा व जर्मन महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर दुःकर्मों की खबरे आईं.। युद्ध जीतने के बाद जर्मनी के दो टुकड़े कर दिए गए । मित्र देशों ने ”यूनाइटेड नेशन” का गठन किया जिससे विश्व में शांति स्थापित रह सके और दुबारा ऐसी घटना न हो ।
